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सर्वातिप्राचीन गंभीररहस्यपूर्णता से अलंकृत संस्कृत न केवल वेद, पुराणादि ग्रन्थो तक ही प्रयोजनपूर्ण है ,अपितु संस्कार के दिव्यालंकार से सु...
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संस्कृतकाव्यशास्त्रे षड्सम्प्रदायास्सन्ति । रस -अलङ्कार-रीति-वक्रोति-ध्वनि-औचित्याः इति । तेषु अलङ्कारस्योद्भवं भाम...
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सामवेदीय मंत्रो के उपर संख्या के माध्यम से १, २, ३, अङ्को में क्रमशः उदात्त , अनुदात्त , एवं स्वरित स्वरों को दर्शाया गया है। ...

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