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सर्वातिप्राचीन गंभीररहस्यपूर्णता से अलंकृत संस्कृत न केवल वेद, पुराणादि ग्रन्थो तक ही प्रयोजनपूर्ण है ,अपितु संस्कार के दिव्यालंकार से सु...
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समासशक्तिविमर्शः यस्मिन् समुदाये पदद्वयं वा पदत्रयं वा परस्परं समस्यते स सम ु दायः समासः इति । प्राक्कडारा समासः [i] - समासस...
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सामवेदीय मंत्रो के उपर संख्या के माध्यम से १, २, ३, अङ्को में क्रमशः उदात्त , अनुदात्त , एवं स्वरित स्वरों को दर्शाया गया है। ...