शनिवार, 9 जून 2018

ऋग्वैदिक मण्डलों में विभक्त सूक्त एवं उनके ऋषि


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मण्डल

ऋषि

प्रसिद्धसूक्त

संवाद/आख्यान

दार्शनिक सूक्त

कुल सूक्त
मन्त्र संख्या
विशेष
प्रथम
मण्डल
मधुच्छन्दा
(शतार्चिन)
अग्निसूक्त
मरूत सूक्त
सूर्य सूक्त
विष्णू सूक्त
इन्द्र मरूत संवाद
अगस्त्य-लोपमुद्रा
191
2006
इस मण्डल के ऋषियों को सौ ऋचाओं का द्रष्टा शतार्चिन कहा गया है
द्वितिय
मण्डल
गृत्समद
इन्द्र सूक्त

43
429
गार्त्स्मद् मण्डल में इन्द्र,अग्नि,वरूण आदि देवों की स्तुतियां
तृतीय
मण्डल
विश्वामित्र
रूद्र सूक्त
नदी सूक्त
मित्र सूक्त
ऊषस सूक्त
संवाद सूक्त
विश्वामित्र-नदी
62
617
वैश्वामित्र मण्डलमें इन्द्र,अदिति,अग्निपूजा,उषा तथा अश्नि आदि देवों की स्तुति
चतुर्थ
मण्डल
वामदेव
अग्नि सूक्त
सविता सूक्त

58
589
इस मण्डल में महर्षि ने अग्नि,इन्द्र,वरूण,सोम,ऋभु आदि देवों की स्तुति
पंचम
मण्डल
अत्रि
पर्जन्य
श्यावाश्च सूक्त
87
727
आत्रेय मण्डलमें अग्नि इन्द्र,मरूत,विश्वेदेव आदि देवों की स्तुतियां
षष्ठ
मण्डल
भारद्वाज
पूषा सूक्त

75
765
अग्नि,इन्द्र,ऊषा आदि देवताओं की स्तुतियां
सप्तम
मण्डल
वसिष्ठ
आप सूक्त
वास्तोष्पति
वरूण सूक्त
वसिष्ठ-सुदास संवाद
मण्डूक सूक्त
104
841
द्वितीय से सप्तम मण्डल वंशमण्डलकहलाते हैं

अष्टम
मण्डल
कण्व
अङ्गिरस के वंशज
विश्वेदेव सूक्त

103
1716
11बालखिल्यसूक्त युक्तमण्डल
(आधुनिक विद्वानों के अनुसार प्राचिन)
नवम
मण्डल
सोम,पवमान
सोमसूक्त

114
1108
यह मण्डल सोम को समर्पित है।
अतः सोममण्डल कहलाता है।
दशम
मण्डल
त्रित,विमद
आदि
अक्ष सूक्त
पुरूष सूक्त
हिरण्यगर्भ सूक्त
वाक् सूक्त
रात्रि सूक्त
नासदीय सूक्त
वात सूक्त

संवादसूक्त
यम-यमी
पुरूरवा-उर्वशी
सरमा पणि
दार्शनिक सूक्त
पुरूष सूक्त-
हिरण्यगर्भ
नासदीयसूक्त
191
1754
भाषा की दॄष्टि से सर्वाधिक
अर्वाचीन मण्डल

                                                                                 
                                 



                                                                                                                         शिव त्रिपाठी
                                                                                                                रा.सं.सं. भोपाल परिसर

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