रविवार, 7 अप्रैल 2019

कारक-सामान्य भेद

कर्तृ-प्रकाराः

·      चेतनः

·      अचेतनः मूर्तः (रथः, शकटः)

·      अचेतनः अमूर्तः (क्रोधः, ज्वरः)

·      अनुभवी – (वर्धते, क्षीयते इत्यादिभावविकाराणां कर्ता)

·      कर्म कर्ता – (ओदनः पच्यते स्वयमेव)

·      करणकर्ता – (काष्ठानि पचन्ति)

·      अधिकरणकर्ता – (स्थाली पचति)

·      शुद्धः हेतुः/ प्रयोजकः/ प्रेरकः – (देवदत्तः विष्णुमित्रेण पाचयति)

·      शुद्धः प्रयोज्यः – (देवदत्तः विष्णुमित्रेण पाचयति)

·      मध्यस्थः – (चैत्रः देवदत्तेन विष्णुमित्रेण पाचयति)

·      अभिप्रेरकः – (देवदत्ताय रोचते मोदकः)
कर्म-प्रकाराः
·      निर्वर्त्यम्

·      विकार्यम्

·      प्राप्यम्

·      उदासीनम्

·      द्वेष्यम्

·      अकथितम्

·      आधार कर्म (अधिशी-------कर्म)

·      प्रयोज्यः

·      कालः

·      देशः

·      भावः (क्रियया सूचितः कालः)

·      मार्गपरिमाणम्

·      गतिकर्म

·      सम्प्रदानकर्म

करण-प्रकाराः
·      करणम्

·      कर्मरूपं करणम् (केवलं यजधातोर्विषये पशुना रुद्रं यजते)

·      कर्मकरणम् (युगपदेव संज्ञाद्वयम् मनसादेवः)

संप्रदान प्रकाराः
·      मुख्यसंप्रदानम् (याचकाय धनं ददाति)

·      गौणसंप्रदानम् (रजकाय वस्त्रं ददाति, शिष्याय चपेटां ददाति)

·      क्रियोद्देश्यं (युद्धाय सन्नह्यति)

·      परिक्रयणसाधनं धनम् (शताय परिक्रीणाति)

·      विप्रश्नविषयः (कृष्णाय राध्यति)

·      कोपोद्देश्यं

·      ईप्सितं

·      उत्तमर्णः

अपादान प्रकाराः

·      अवधिरूपम्

·      भयहेतुः

·      वारणे अवधिः

·      असोढः (पराजेरसोढः)

·      कर्तुः अदर्शनविषयः

·      विभक्तम्

·      आख्याता

·      प्रकृतिः

·      प्रभवः

·      जुगुप्सितम्

·      प्रमादस्य विषयः

·      विरमणविषयः

अधिकरण प्रकाराः

·      अन्तर्दैशिकम् (औपश्लेषिकम्, अभिव्यापकं च)

·      बहिर्दैशिकम् (औपश्लेषिकम्)

·      कालिकम्

·      वैषयिकम्

·      पर्यन्ताधिकरणम् (पर्यन्तं यावत् इति शब्दाभ्यां बोध्यमानं दैशिकं कालिकं च)


 
शिव त्रिपाठी 








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